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सपा की सियासी प्रयोगशाला में रणनीतिकारों की धड़कनें तेज

सपा की सियासी प्रयोगशाला में जिस तरह से लोहियावाद के साथ आंबेडकरवाद का मिश्रण तैयार हो रहा है उससे बसपाई रणनीतिकारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। अपने काडर वोटरों को सहेजने की चुनौती बढ़ गई है। बसपाई खेमे में इस पर चिंतन भी शुरू हो गया है कि सपा के इस दांव की काट कैसे निकाली जाए।

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम कुछ ऐसा आया कि उसने कई पार्टियों के सारे समीकरण उलट दिए। खासतौर पर बाबा साहब आंबेडकर के अनुयायी कहे जाने वाले दलित वोटरों का रुख कई अलग संकेत दे गया। इन्हें बसपा अपना काडर वोटर मानती रही है और इनके ही दम पर पार्टी सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला अपना कर सत्ता के शिखर तक कई बार पहुंच चुकी है। पर बीते विधानसभा चुनाव में यह वोटर बसपा से खिसक गया।

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