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ऑक्सीजन की किल्लत : गंगाराम अस्पताल में 25 कोरोना मरीजों ने तोड़ा दम, 60 मरीजों की जान जोखिम में…

देशभर में ऑक्सीजन संकट के बीच अस्पतालों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की हालत बदतर होती जा रही है। वक्त पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाने की वजह से दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती 25 कोरोना मरीजों ने 24 घंटे के भीतर दम तोड़ दिया। वहीं, 60 और मरीजों की जान जोखिम में है। वहीं मध्यप्रदेश के जबलपुर में पांच मरीजों की जान गई। 

दिल्ली के होली फैमिली, बत्रा अस्पताल और वसंत कुंज स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में कुछ ही घंटे की ऑक्सीजन शेष रह गई है। इनके अलावा रोहिणी स्थित धर्मवीर सोलंकी अस्पताल से मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। वहीं, निजी अस्पतालों ने भी नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी है।

इस बीच, मध्य प्रदेश के जबलपुर में शुक्रवार को एक निजी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण आईसीयू में भर्ती पांच कोरोना मरीजों ने दम तोड़ दिया। अस्पताल को 10 ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति होनी थी, लेकिन वाहन खराब होने के चलते सिलिंडर वक्त पर नहीं पहुंच सके। 

इस बीच, सरकार के सूत्रों ने बताया कि गंगाराम अस्पताल को पर्याप्त ऑक्सीजन मुहैया करा दी गई है। एक टैंकर अस्पताल पहुंच गया। वहीं, अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा, टैंकर पहुंच गया, मगर यह उपभोग के आधार पर पांच घंटे के लिए ही है।

इससे पहले अस्पताल में बृहस्पतिवार रात ऑक्सीजन बेहद कम मात्रा में बची थी। अस्पताल ने रात आठ बजे ही ऑक्सीजन खत्म होने और जल्द से जल्द आपूर्ति की मांग की थी, मगर रात एक बजे उनके पास केवल एक टन ही ऑक्सीजन पहुंची। तब तक मरीजों को कम दबाव पर ऑक्सीजन देनी पड़ी, जिसके चलते 25 मरीजाें की सांसें थम गई।

इनमें से तीन की मौत अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर हुई। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर के मुताबिक, वेंटिलेटर और अन्य मशीनें प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही हैं। ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा न होने से बड़े संकट की आशंका है।

इस बीच, दिल्ली सरकार के राजीव गांधी अस्पताल में शुक्रवार को ऑक्सीजन की कमी के चलते उपलब्ध ऑक्सीजन बिस्तरों की संख्या 500 से घटाकर 350 कर दी गई। अभी मरीजों की जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाई है।

शुक्रवार दोपहर तक अस्पताल में 6 मीट्रिक टन की आपूर्ति थी। यह ऑक्सीजन वहां भर्ती 350 मरीजों के लिए ही पर्याप्त है, इस वजह से अस्पताल ने ऑक्सीजन वाले बेड की संख्या में 150 बिस्तरों की कटौती की है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अपर्याप्त संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते संक्रमितों के संपर्क में आए स्वास्थ्य कर्मियों की जांच और बिना लक्षण वाले संपर्कों के पृथक वास को बंद करने का फैसला किया है।
अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी की बात नकारी
गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन डॉ डीएस राणा ने इस बात को नकार दिया है कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से मरीजों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि आईसीयू में पहले ऑक्सीजन का दबाव कम हो गया था। उस दौरान हम लोगों ने मैनुअल तरह से ऑक्सीजन दी थी।

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि सोमवार से ही ऑक्सीजन की किल्लत है। जरूरत के अनुसार उन्हें ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो रही है, जिसके चलते मरीजों की लो प्रेशर से मौत हुई। यहां लगभग 500 से अधिक संक्रमित भर्ती हैं, जिनमें लगभग 150 को उच्च प्रवाह ऑक्सीजन सहायता प्राप्त है।

भिलाई-ओडिशा से अब तक नहीं पहुंची ऑक्सीजन
भिलाई और ओडिशा से दिल्ली के लिए ऑक्सीजन आने वाली है, लेकिन शुक्रवार शाम तक यह दिल्ली नहीं पहुंची। बताया जा रहा है कि एक या दो दिन का वक्त लग सकता है। तब तक कुछ मात्रा में ऑक्सीजन मिल रही है। बड़ी बात यह है कि केंद्र से पहले 380 और फिर 102 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आवंटित करने का आदेश जारी हुए क्रमश: चार और दो दिन हो चुके हैं, लेकिन हालात वही हैं।

ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए वायुसेना के सी-17 और आईएल-76 विमानों ने संभाला मोर्चा
भारतीय वायुसेना के विमानों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में ऑक्सीजन के बडे़-बडे़ टैंकर पहुंचाने का जिम्मा संभाल लिया है, ताकि ऑक्सीजन की आपूर्ति में तेजी लाई जा सके। वायुुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर और आईएल-76 विमानों ने देशभर में अपनी ऑक्सीजन सेवा की शुरुआत कर दी है।

सी-17 और आईएल-76 विमानों ने बृहस्पतिवार को दो खाली क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनरों और आईएल-76 विमान ने एक खाली कंटेनर को पश्चिम बंगाल के पानागढ़ पहुंचाया। इन तीनों कंटेनरों को ऑक्सीजन से भरकर दिल्ली लाया जाएगा। वहीं, सी-17 ग्लोबमास्टर और आईएल-76 विमानों ने गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस तक क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनरों को पहुंचाया।

जर्मनी से एक हफ्ते में आएंगे 23 सचल ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र
रक्षा मंत्रालय ने जर्मनी से 23 सचल ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र हवाई मार्ग से लाने का फैसला किया है। हर संयंत्र की क्षमता 40 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट और 2400 लीटर ऑक्सीजन प्रति घंटा उत्पादन करने की है।

मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता ए भारत भूषण बाबू ने कहा कि इनकी स्थापना कोविड-19 के मरीजों का उपचार करने वाले सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (एएफएमसी) के अस्पतालों में की जाएगी। इन संयंत्रों को एक हफ्ते में हवाई मार्ग से लाए जाने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट में चल रहे मामलों को हमने नहीं मंगाए
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर लिए गए स्वत: संज्ञान मामले में वरिष्ठ वकीलों द्वारा की गई आलोचना पर शुक्रवार को कहा, हाईकोर्ट के मामलों को सुप्रीम कोर्ट में मंगाने का हमारा कोई इरादा नहीं था, ऐसे में ऐसी आलोचनाएं निराधार हैं। इस मामले की सुनवाई अब मंगलवार को होगी। 
लोग मर रहे हैं, ऐसे में संयंत्र न खोलने का बहाना नहीं चलेगा: शीर्ष कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने शुक्रवार को वेदांता की याचिका पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु से कहा, जब ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे हो तो राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे के कारण इसे नहीं खोला जा सकता। यहां बात वेदांता या किसी अन्य कंपनी की नहीं है।

राज्य सरकार इस तरह का तर्क नहीं दे सकती। दरअसल तमिलनाडु सरकार वेदांता की उस याचिका पर विरोध कर रही है जिसमें कंपनी ने ऑक्सीजन उत्पादन के लिए तूतीकोरिन में संयंत्र शुरू करने की इजाजत मांगी है। 

50 टन तरल ऑक्सीजन लेकर बोकारो से लखनऊ रवाना हुई एक्सप्रेस
यूपी में ऑक्सीजन की भारी किल्लत के बीच शुक्रवार को बोकारो से करीब 50 टन तरल ऑक्सीजन को लेकर दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस लखनऊ के लिए रवाना हुई। भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) और भारतीय रेलवे ने मिलकर यह कदम उठाया है।

सेल के बोकारो स्थित स्टील संयंत्र से निकली ऑक्सीजन एक्सप्रेस लखनऊ में शनिवार सुबह करीब 10 बजे तक पहुंचेगी। पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस महाराष्ट्र में नागपुर के लिए चलाई गई है।

दिल्ली के आग्रह पर राऊरकेला से ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाने की तैयारी: रेलवे
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सुनीत शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद आंध्र प्रदेश और दिल्ली सरकार ने भी ऑक्सीजन एक्सप्रेस सेवा चलाने की मांग की है।

दिल्ली सरकार से अभी अनुरोध मिला है और हम इस बारे में योजना बना रहे हैं। हमें राऊरकेला से ऑक्सीजन मिलने की उम्मीद है। हमने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह अपने ट्रक तैयार रखें और हमने भी तैयारी कर ली है।

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