उत्तर प्रदेश

लखनऊ: हरिकिशोर तिवारी का बड़ा बयान, कहा- कर्मचारियों को मौत के मुंह में ढकेल रही सरकार

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेष

’कर्मचारियों को मौत के मुंह में ढकेल रही सरकार
’पंचायत चुनाव बन रहे कर्मचारियों की मौत की मुख्य वजह
’तत्काल मतगणना को रोके जाने की मांग

लखनऊ 29 अप्रैल। वैश्विक महामारी के कारण जहाॅ पूरे विश्व के साथ देश के हालत खराब है, वही प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों की डियुटी में लगे कर्मचारी, शिक्षक और जूनियर इंजीनियर्स असमय काल के गाल में समा रहे है।

बिना किसी गाइड लाइन का पालन किए अपनाई जा रही चुनाव प्रक्रिया से यह संक्रमण तेजी से पंचायत चुनाव डियुटी में लगे लोगों को अपना शिकार बना रहा है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव,वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह ने इस पर चिन्ता जताते हुए एक बार फिर राज्य सरकार को आगाह किया है कि पंचायत चुनाव के नाम पर कर्मचारी, शिक्षक और अवर अभियंताओं की जिन्दगी से खिलवाड़ बंद करें। उन्होंने इस बाॅत पर अफसोस जताया कि अब तक लगभग 750 कर्मियों की.मौते होने की सूचना प्राप्त हो पाई है। जिसमें उनके परिवारों की मौत अभी सम्मिलित नहीं है उनका कहना है कि लम्बे अरसे से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को इस सम्बंध में सम्बोधित करते हुए कोविड गाइड लाइन के अनुपालन, अगले चरणों के मतदान रोकने की मांग कर चुका है। उनका कहना है कि अब भी समय है कि मतगणना का कार्यक्रम कुछ समय के लिए टाल दिया जाए।
हरिकिशोर तिवारी और शिवबरन सिंह यादव,वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह ने बताया कि हम पहले से ही आग्रह कर रहे थे कि किसी भी कर्मचारी, शिक्षक और जूनियर इंजीनियर्स को बिना संसाधन, पीपीई किट चुनाव डियुटी पर न भेजा जाए लेकिन ऐसा नही किया गया। बस्ते बटने से लेकर प्रशिक्षण तक में कोविड गाइड लाइन के अनुपालन की धज्जियां उड़ती रही। इसके चलते कर्मचारी, शिक्षक और जूनियर इंजीनियर्स स्वंय तो संक्रमित हुआ उससे उसके घर भी संक्रमण पहुुच गया।उनका कहना है कि एक तरफ पाॅच लोगों को एक साथ खड़े होने पर पाबंदी लगाई जा रही है दूसरी तरफ सैकड़ों हजारों लोगों को बिना संसाधन, बिना सोशल डिस्टेसिंग, बिना सैनेटारइजेश प्रशिक्षण और मतदान प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ऐसी ही स्थिति अभी मतगणना के दौरान उत्पन्न होगी। अभी तक परिषद के पास जनपदवार और विभाग वार जो कर्मचारी शिक्षक और अवर अभियंताओं के मौत के आकड़े आए है वह चैकाने वाले है। सरकार को चाहिए कि जिन शासकीय सेवकों की मौत हुई है उनके परिजनों को बिना लम्बी प्रक्रिया अपनाए तत्काल पचास पचास लाख का मुआवजा उपलब्ध कराये। उन्होने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव डियुटी में लगे कर्मचारी, शिक्षक और जूनियर इंजीनियर्स स्वंय डरे है और उनके परिजन संशकित है। परिषद इस सम्बंध में एक बार फिर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से मांग करता है कि वह मतगणना प्रशिक्षण एवं मतगणना की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दे। सरकार अगर इस विषम स्थिति में कोई फैसला नही लेती तो मजबूरन परिषद को आन्दोलन के लिए विवश होना पड़ेगा।

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