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दिल्ली : सरोज अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन खत्म, चंद सिलिंडर से 130 मरीज लड़ रहे जिंदगी-मौत की जंग

दिल्ली समेत पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर कहर बनकर टूट रही है। एक ओर जहां लोग टेस्ट कराने के लिए लंबा इंतजार कर रहे हैं, वहीं बीमारी गंभीर होने के बाद ऑक्सीजन की कमी ने हालात को लगभग काबू से बाहर कर दिया है। 

सरोज अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन खत्म
दिल्ली के सरोज अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन खत्म होने से परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल के स्टॉक में कुछ ऑक्सीजन सिलिंडर बचे हैं जिनसे काम चलाया जा रहा है और यह स्टॉक भी दो-तीन घंटे में खत्म हो जाएगा। यहां कोरोना के 130 मरीज भर्ती हैं। ऐसे में यहां समय से ऑक्सीजन न पहुंचा तो परेशानी हो सकती है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनी आईनॉक्स उनके कॉल का जवाब नहीं दे रही है।

हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट में तीन-चार घंटे की ऑक्सीजन शेष
दिल्ली के हार्ट एंड लंग इंस्टिट्यूट अस्पताल में तीन से चार घंटे की ऑक्सीजन बची है। अस्पताल में अभी 70 से ज्यादा मरीज हैं, जिसमें से कई ऑक्सीजन पर हैं।

सत्येंद्र जैन ने कहा- विभिन्न अस्पतालों के हालात अलग
दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की किल्लत पर आज स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अलग-अलग अस्पतालों में हालात भिन्न हैं। कहीं छह घंटे, कहीं आठ घंटे तो कहीं 10 घंटे का स्टॉक बचा है। हमें इसे अच्छी स्थिति नहीं कह सकते। सत्येंद्र जैन ने आगे कहा कि बीते तीन दिनों से दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी है। केंद्र ने कल दिल्ली का कोटा बढ़ाया है। वह सभी राज्यों को ऑक्सीजन आवंटित कर रहे हैं।

पहले दिल्ली का कोटा जरूरत से कम था अब ये बढ़ाया गया है। अगर ये क्राइसिस एक दो-दिन में खत्म हो जाता है तो बेड बढ़ाए जाएंगे। इस वक्त आईसीयू बेड्स की कमी है। हमने केंद्र से बेड की मांग की है, हमें उम्मीद है कि केंद्र हमें 700-800 आईसीयू बेड जल्द देगी। हमने केंद्र से उनके सरकारी अस्पतालों में 7000 बेड मांगे थे लेकिन करीब 2000 बेड ही मिले हैं।

दिल्ली के कई अस्पतालोंं में ऑक्सीजन की कमी
इस वक्त दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल और चन्नन देवी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते कई मरीजों की जान खतरे में है। राजीव गांधी अस्पताल में तो सिर्फ दो घंटे का ऑक्सीजन बचा है। यहां 900 मरीज भर्ती हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां रोजाना 5-6 टन ऑक्सीजन की जरूरत होती है। दिल्ली के रोहिणी में मौजूद सरोज अस्पताल में भी ऑक्सीजन का स्टॉक सिर्फ दो घंटे का बचा है।

बीती रात भी ऑक्सीजन की किल्लत लगातार जारी रही और कई अस्पतालों में स्टॉक खत्म हो गया है। इस बीच दिल्ली के नजफगढ़ स्थित राठी अस्पताल ऑक्सीजन खत्म हो गया था जिससे इमरजेंसी के हालात पैदा हो गए थे लेकिन देर रात ऑक्सीजन का स्टॉक यहां पहुंचा।

मैक्स के अस्पतालों में हुई थी ऑक्सीजन की कमी
मैक्स अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बीते मंगलवार रात शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो गई। काफी समय से वह इसकी सूचना दिल्ली सरकार को दे रहे थे। उन्हें पता चला कि ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए एक टैंकर उनके पास भेजा रहा है लेकिन देर रात पता चला कि वह टैंकर शालीमार बाग न पहुंचकर दिल्ली एम्स भेज दिया। इसके चलते उनके ऑक्सीजन टैंक खाली हो गए। ऐसी गंभीर परिस्थिति में मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे ही संभालना पड़ रहा है।

फिलहाल अस्पताल प्रबंधन ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था मैक्स हेल्थ केयर नेटवर्क के दूसरे अस्पतालों से मांगकर कर रहे हैं। मैक्स के मुताबिक उनके 250 कोरोना मरीज भर्ती हैं, अधिकतर ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। इस घटना की वजह से उनके मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ी है और इससे हालात काफी गंभीर हो सकते हैं। मैक्स ने सरकार से अपील की है कि सरकार ऑक्सीजन की आपूर्ति उनके अस्पतालों को सुनिश्चित करें। मैक्स प्रबंधन के मुताबिक उन्हें रोजाना 25 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। मैक्स प्रबंधन ने शिकायत की प्रति केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को भी भेजी है।

उधर इस मामले को लेकर एम्स प्रबंधन का कहना है कि उनके यहां मुख्य अस्पताल परिसर और ट्रामा सेंटर में कोरोना मरीज भर्ती हैं। मुख्य अस्पताल परिसर में 33 ऑक्सीजन बेड हैं जबकि ट्रामा सेंटर में 226 ऑक्सीजन और 71 आईसीयू बेड हैं। बुधवार दोपहर को यह सभी पूरी तरह से भर चुके हैं और अब मरीजों को झज्जर स्थित एम्स के ही कैंसर अस्पताल में भेजा जा रहा है। एम्स प्रबंधन के अनुसार उन्होंने किसी भी अस्पताल के कोटा से ऑक्सीजन नहीं लिया है। उन्होंने आरोप से इंकार करते हुए कहा कि ऑक्सीजन वितरण की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार के पास है। इसमें अस्पताल के स्तर पर कोई दखलअंदाजी नहीं है। ऐसे में एम्स पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। 

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