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राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गठबंधन में दरार बढ़ने की आशंका

महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन की सरकार गिरने के बाद अब राजनीतिक पंडितों की नजरें देश के पूर्वी छोड़ पर मौजूद झारखंड में चल रहे घटनाक्रम पर हैं। एक तरफ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके करीबियों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गठबंधन सहयोगियों झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ती दिख रही है। देश के कई हिस्सों में मॉनसून की भारी बारिश के बीच झामुमो-कांग्रेस सरकार पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी फिलहाल इस तरह की आशंकाओं को खारिज करते हुए सबकुछ ठीक-ठाक होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, रांची और दिल्ली के सियासी गलियारों में झारखंड की ढाई साल पुरानी सरकार को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही हैं। राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी की ओर से चला गया आदिवासी दांव इसकी एक बड़ी वजह है। एनडीए ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर द्रौपदी मुर्मू को उतारकर झारखंड में गठबंधन सहयोगियों में दरार पैदा कर दी है।

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