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अब खामोशी से रणनीति बदल रहे अखिलेश यादव

चुनावी जंग को  80 बनाम 20 या यूं कहें ध्रुवीकरण में बदलने से रोकने के लिए अखिलेश यादव अब खामोशी से रणनीति बदल रहे हैं। वह  पार्टी के अधिकांश मुखर मुस्लिम नेताओं को चुनाव मैदान में उतारने के बजाए पर्दे के पीछे कर रहे हैं। वह  खुद भी ऐसी सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं जहां मुस्लिम वोट बहुत कम हैं। बदले  हुए हालात में कई जगह विरोधियों का मुकाबला करने के लिए पूर्व घोषित मुस्लिम प्रत्याशियों की जगह सवर्णों को टिकट दिया जा रहा है।

भाजपा की ओर से तमाम चुनौतियों से मुकाबला करने में जुटी समाजवादी पार्टी किसी भी तरह चुनाव में वोटों का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण रोकना चाहती है। उसकी कोशिश 15 बनाम 85 करने की है। यानी पिछड़ों, दलितों मुस्लिम को अपने साथ लाकर सवर्णों में भी सेंधमारी शामिल है। सपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य इसका संकेत दे चुके हैं। अलग-अलग पिछड़ी जातियों में थोड़ा-थोड़ा आधार रखने वाले नेताओं को साथ लाकर सपा ओबीसी समीकरण तैयार किया है और इसमें सावित्री बाई फुले, इंद्रजीत सरोज, केके गौतम, आर के चौधरी, मिठाई लाल भारती जैसे दलित नेताओं के जरिए दलित वोट में भी सेंधमारी की कोशिश की जा रही है।

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