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वाणिज्य कर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ी गई 10.66 करोड़ की चोरी, टीम ने मौके से वसूल किया 51 लाख रुपये का जुर्माना

गोमती नगर स्थित एक कंपनी की 10.66 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है। वाणिज्य कर (जीएसटी) विभाग की प्रवर्तन इकाई ने बड़ी कार्रवाई की है। इसने कोई सामान नहीं लिया लेकिन 2017 से अब तक इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा उठाता रहा। टीम ने मौके से 51 लाख रुपये का जुर्माना वसूल किया है।

शेष जुर्माने की वसूली जारी है। यह फर्म ह्यूमन रिसोर्सेज के काम में लगी हुई है। यहां टैक्स छिपाए जाने का पता चलने के बाद जीएसटी टीम हरकत में आई।अपर आयुक्त ग्रेड 2 भूपेंद्र शुक्ला के निर्देश पर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने स्थापना की जांच की. जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। कारोबारियों ने अलग-अलग वित्तीय वर्षों में टैक्स चोरी के लिए नए-नए तरीके अपनाए। मैन पावर उपलब्ध कराने वाली एक सेवा प्रदाता कंपनी ने फर्जी फर्म बनाकर लगातार तीन वर्ष तक सरकार को करोड़ों का चूना लगाया। कंपनी ने फर्जी फर्म बनाकर सरकार से आईटीसी क्लेम का करीब 10.66 करोड़ रुपये वसूला।

जांच में इतनी बड़ी जीएसटी चोरी देख अफसरों के होश उड़़ गए। विभाग ने तत्काल करीब 50 लाख रुपये जमा करा लिए हैं। नया तरीका देख जांच के बाद महकमे में हड़कंप मच गया। वर्ष 2017-18 में, दो फर्मों का गठन किया गया और बिना किसी खरीद या बिक्री के एक-दूसरे को कर चालान जारी किए गए। आईटीसी के रूप में इसे 2.37 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। इसके बाद साल 2018 से 2020 के बीच करीब सात करोड़ रुपये के टैक्स का फायदा फर्जी आईटीसी के जरिए लिया गया. भले ही कोई खरीद नहीं हुई थी, लेकिन इसे केवल रिटर्न में दिखाकर लाभ लिया गया था। साल 2021-22 में कारोबारी ने टैक्स चोरी का नया तरीका अपनाया। इस बार उसने अपने भाई के नाम से दूसरे शहरों में एक फर्म खोली।

यानी चार वर्षों तक जो इनवाइस जारी की गई उसमें फर्जी फर्मों के माध्यम से आईटसी दिखाई गई लेकिन बिना कर जमा किए ही सरकार से वसूल लिया गया। फर्म द्वारा कोई टैक्स जमा नहीं किया गया। जबकि नियमानुसार कर की देयता 10.66 बनती थी। जांच में राजफास होते ही प्रवर्तन दल अवाक रह गया और उच्चाधिकारियों एडिशनल कमिश्नर को जानकारी दी।

अपने को फंसता देख व्यापारी ने 50 लाख रुपया तत्काल जमा किया। साथ ही जल्द ही करीब दस करोड़ जमा कराने का आश्वासन दिया। इस फर्म से सामान की खरीद दिखाकर 6.25 करोड़ का आईटीसी लाभ लिया गया। ITC यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट वह टैक्स है जो एक फर्म खरीद के समय चुकाती है। जब यह इसे और बेचता है, तो इसका उपयोग अपनी कर देयता को कम करने के लिए करता है। यानी दूसरे शब्दों में, व्यवसाय खरीद पर भुगतान किए गए जीएसटी के लिए क्रेडिट का दावा करके अपने कर बिल को कम कर सकता है।

एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-दो भूपेंद्र शुक्ला ने बताया कि ज्वाइंट कमिश्नर के नेतृत्व में बड़ी कर चोरी का राजफास हुआ है। फर्जी तरीके से फर्म बनाकर आईटीसी क्लेम लिया जा रहा है। इस बड़ी कर चोरी से विभाग ने अब सेवा प्रदाता कंपनियों की जांच कराए जाने का फैसला लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

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